आंबेडकरवाद क्या है

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आंबेडकरवाद  किसी भी धर्म, जाति या रंगभेद को नहीं मानता, आंबेडकरवाद  मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानव बनाने का नाम है।आंबेडकरवाद  वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों का नाम है।आंबेडकरवाद  ‘भारतीय संविधान’ तथा ‘बुध्द और उसका धम्म’ इन ग्रंथों को भी कहा जा सकता है।एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर समाज और मानवहित में कार्यरत हो। सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाना आंबेडकरवाद  कतई नहीं है।

आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है, परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वे लोग छोड़ने को तैयार नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ??? अगर ऐसा होता तो शायद आंबेडकरवाद  का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से पहले रुढ़िवादी विचारों को छोड़ना पड़ेगा। वैज्ञानिक तथ्यों पर विचार करना पड़ेगा, तभी अम्बेडकरवादी कहलाना सार्थक होगा।

आंबेडकरवाद  दुनिया की सबसे प्रभावशाली और विकसित विचारधारा का नाम है, दुनिया में ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका समाधान आंबेडकरवाद  में ना हो। आइये, आंबेडकरवाद  के बारे कुछ जानते है:

  1. गैर बराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर मानवतावादी व्यवस्था का निर्माण करना आंबेडकरवाद है।
  2. आंबेडकरवाद यह मानव मुक्ती का विचार है, एक वैज्ञानिक दृष्टीकोण है।
  3. मानवतावाद ही आंबेडकरवाद है।
  4. मानवीय गरिमा (human dignity) के लिये चलाया गया आंदोलन ही आंबेडकरवाद है।
  5. मानव का इसी जन्म में कल्याण करने वाली विचारधारा का नाम आंबेडकरवाद है।

6.सबकी मुक्ति, विकास और मानव कल्याण का मार्ग ही आंबेडकरवाद  है।

  1. इंसान को जन्म देनेवाली, जीवन जिने का मार्ग देने वाली विचारधारा आंबेडकरवाद है।
  2. मानसिक और सामाजिक उत्थान, आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक बदलाव को आंबेडकरवाद कहा जा सकता है।
  3. आंबेडकरवाद एक ऐसा विचार एवं आंदोलन है, जो अन्याय और शोषण के खिलाफ कार्यरत रहता है और उसकी जगह विकल्प के रूप में एक मानवतावादी व्यवस्था पेश करता है।
  4.  वर्चस्ववाद का विनाश करने वाली क्रांतिकारी विचारधारा को आंबेडकरवाद कहते है।
  5. आंबेडकरवाद यह केवल विचार का दर्शन ही नही है बल्की वह सामाजिक-शैक्षणिक-धार्मिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन में बदलाव लाने का एक संपूर्ण आंदोलन है।
  6. आंबेडकरवाद एक ऐसी विचारधारा है जो हमें मानवतावाद की ओर ले जाती है। व्यवस्था के गुलाम लोगो को गुलामी से मुक्त कर मानवतावाद स्थापित करना ही आंबेडकरवाद है।

सम्पूर्ण मानवजाति का जिसमे विकास हो ऐसी , समता–स्वतंत्रता–बंधुत्व एवं न्याय इन तत्वों  के आधार पर बनी एक सम्पूर्ण  सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना ही आंबेडकरवाद  है।

साभार: रामावतार यादव

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