हम मुसलमान है साहब हिंदुस्तान के मुसलमान

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हम मुसलमान है साहब। हमें कुतुब मीनार सी ऊँचाई ताजमहल सी खूबसूरती और लाल किले सी मजबूती देने का हुनर बखूबी आता है।
हम मुसलमान है साहब हिंदुस्तान के मुसलमान। हमने इसी मिट्टी में जन्म लिया हम इसी मिट्टी मे पलकर बड़े हुए है और मरकर इसी मिट्टी में दफन भी होंगे. हमारा हक हैं यहाँ की मिट्टी पर क्योंकि हमारे पुरखों का खून शामिल है इस मिट्टी में. हमें मोहब्बत है इस मिट्टी से क्योंकि हमारे पुरखों ने अपनी जवानियाँ न्योछावर की है इस मिट्टी के लिए. हमारा ईमान है ये मिट्टी क्योंकि इस मिट्टी को अंग्रेजों से पाक करने के लिए खून का एक एक कतरा निचोड़ दिया है हमारे पुरखों ने. ये मिट्टी आन बान और शान है हमारी क्योंकि हमारे पुरखों ने बंटवारे के समय भी इसे छोड़ना गवारा ना किया!

हम मुसलमान है साहब हिंदुस्तान के मुसलमान। हमारे पुरखों ने आजादी के पहले इस देश की मिट्टी के लिए जो कुर्बानियाँ दी थी उसे हमारी नस्ले आज भी बदस्तूर निभा रही है. देश की सीमाओं की रक्षा के के लिए हमारी नस्लों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. वीर अब्दुल हमीद से लेकर इरशाद और सलमान तक हम इस देश के लिए खून का आखरी कतरा निचोड़ने से भी नहीं चूके. जब जब वतन की मिट्टी ने हमें पुकारा है तब तब हम कांधे कांधा मिलाकर सबके साथ नज़र आये है. हमें जब जब किस्मत ने मौका दिया है हमने तब तब देश को गौरवान्वित करने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं दिया है!

हम मुसलमान है साहब हिंदुस्तान के मुसलमान। कभी हमने युसुफ (दिलीप कुमार) बनकर देश की खूबसूरत तहज़ीब का गुणगान किया तो कभी मोहम्मद रफी बनकर भाईचारे और मोहब्बत के तराने गाते रहे. कभी हमने इकबाल बनकर देश का सिर सारे जहाँ में ऊंचा किया तो कभी इमरान बनकर मज़लूमों की आवाज़ बनकर फिज़ाओं में गूंजते रहे. कभी हमने बिस्मिल्लाह खान बनकर गंगा जमुनी विरासत की शहनाई दुनियाँ को सुनाई तो कभी हम रहमान बनकर पूरी दुनियाँ में इस मिट्टी की खुश्बू बिखेरते रहे. कभी हमने अजहरुद्दीन बनकर बल्ला थामा तो कभी यूसुफ, इरफान, जहीर, कैफ और शामी बनकर दुनियाँ भर के मैदानों में मोहब्बत की बाउंड्री लगाकर नफरतों को क्लीनबोल्ड करते रहे. कभी हम शाहरुख बनकर परदेश में देश की परंपरा का मान रखा तो कभी हम सलमान और आमिर बनकर देश में नफरती पहलवानों को धूल चटाई और दंगल के मैदान के सुल्तान बन गये. कभी हमने कलाम बनकर देश को परमाणु संपन्न बनाया तो कभी हम मकबूल और हैदर बनकर जिंदगी के कैनवास पर मोहब्बत के रंग बिखेरते रहे!

हम मुसलमान है साहब हिंदुस्तान के मुसलमान। हम यूंही रातोंरात सुल्तान, बादशाह और रईस नहीं बने है. हममें हमेशा से काबिलियत रही है. हम इस काबिल थे और हैं कि हमें जब जब मौका मिला है हमने तब तब ये साबित किया है कि हम काबिल है हमारे अंदर टैलेंट कूट कूट कर भरा हुआ है देश का सिर ऊंचा रखने का जज्बा हमे हमारे पुरखों से विरासत में मिला है. शिकायत बस इतनी है कि हमें मौके भी छीनने पड़ते है, हमें मौकों के लिए भी लड़ना पड़ता है, संघर्ष करना पड़ता है. एक बार खुद से मौका देकर तो देखिए हमारे घरों हमारी बस्तियों हमारे मोहल्लों मे सोना और हीरा भरा पड़ा हुआ है बस एक बार हमें मोहब्बत से तराशने की कोशिश तो कीजिए हम तो वो सोना है जो पहले से ही नफ़रत की भट्टियों मे तपे हुए है हमें कुंदन बनने में देर नहीं लगती. हमे देश को कुतुब मीनार सी ऊँचाई, ताजमहल सी खूबसूरती और लाल किले सी मजबूती देने का हुनर बखूबी आता है!
साभार: सिकंदर खानजादा खान

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